संपर्क करें

powered by MandirDekhoo.com

[ मंदिर सूचना ]

मंदिर क बारे मैं

अग्रवालो की उद्गम स्थली अग्रोहा लम्बे समय तक खेडे के रुप में दबा हुआ थी। वहां की भूमि अपने पुत्रो को पुकार पुकार कर आर्तनाद कर रही थी कि हे मेरे वंशजो तुमने देश के निर्माण अैार उसके विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तुम जहां भी गये हो, जहां भी बसे हो वहीं पर तुम्हे कुल देवी महा लक्ष्मी का आशिर्वाद प्राप्त हुआ है। अब समय आ गया है तुम मेरी तरफ भी देखो, मेरा पुनरुत्थान और पुनर्निर्माण करो। अग्रवालो की जन्म भूमि अग्रोहा की भूमि की इस टीस भरी पुकार को सबसे पहले 1883 में भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्र ने अग्रवालो की उत्पत्ति नामक पुस्तक में लिखी और अग्रवालो का ध्यान उनकी जन्म भूमि अग्रोहा की और दिलाया एवं बतलाया कि अग्रसने जी ही उनके आदि पुरुष है। और उसके बाद अग्रकुल के दीपक श्री ब्रह्मानन्द ने, जिन्हे बाद में स्वामी ब्रह्मानन्द के नाम से सम्बोधित किया जाने लगा। स्वामी ब्रह्मानन्द ने स्थान स्थान पर घूम घूम कर अग्रवालो में यह भावना भरी की हम अपनी पवित्र एवं पावन मातृ भूमि अग्रोहा का पुनर्निर्माण कर उसे पुनः वैभव प्रदान करें। सन् 1975 की 12 अक्टुबर को सयोंजक श्री तिलक राज जी अग्रवाल के सानिध्य में प्रमुख अग्रवाल बन्धुओं का एक दल अग्रोहा पहुॅचा एवं अग्रोहा के उस टीले का सर्वेक्षण किया तथा उस भूमि का भी निरिक्षण कर चयन किया जिसे तीर्थ के रुप में विकसित करना था। सन् 1976 की 24 सितम्बर को ‘‘ महाराजा अग्रसेन‘‘ जी का 25 पैसे वाला डाक टिकट भारत सरकार द्वारा जारी किया गया जिसका विमोचन दिल्ली के विज्ञान भवन में तात्कालीन राष्ट्रपती द्वारा किया गया। भारत सरकार द्वारा कुल 80 लाख टिकट जारी किये गये। सन् 1976 की 29 सितम्बर को ‘‘अग्रेाहा विकास ट्रस्ट‘‘ के तत्वावधान में अग्रोहा धाम के निर्माणार्थ भूमी पूजन, यज्ञ एवॅ शिलान्यास किा गया। सन् 1977 के मई माह में अग्रोहा धाम का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया जिसके अन्तर्गत सर्व प्रथम धर्मशाला का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया। इस धर्मशाला मे 22 कमरो का निर्माण कराया गया जो 1980 में बनकर पूरे हुये। सन् 1979 की एक फरवरी, (बसन्त पंचमी) के दिन महाराजा अग्रसेन मन्दिर के निर्माण का कार्य प्रारम्भ किया गया। सन् 1982 की 31 अक्टुबर केा महाराजा अग्रसेन जी के मन्दिर का गर्भ गृह बन कर तैयार हुआ एवॅ उसका उद्घाटन किया गया। जिसमें हरियाणा के मुख्य मंत्री श्री भजन लाल जी एवं प्रधान मंत्री श्री राजीव गांधी भी उपस्थित हुए। सन् 1983 में कुल देवी महा लक्ष्मी के मन्दिर का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया जो 1985 में पूरा हुआ। सन् 1985 की 28 अक्टुबर , शरद पूर्णिमा को महा लक्ष्मी के मन्दिर में महा लक्ष्मी जी की प्रतिमा की प्रतिष्ठा कराई गई। सन् 1985 में ‘‘शक्ति सरोवर‘‘ का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया, सरोवर मेें पानी लाने हेतु तीन कि0मि0 की दूरी पर बहने वाली मुख्य नहर से पक्के नाले के माध्यम से शक्ति सरोवर केा जोडने की योजना बनाई गई। सरोवर में भव्य समुद्र मंथन की झांकी का भी निर्माण कराया गया। सन् 1986 की 18 अक्टुबर को ‘‘शक्ति सरोवर‘‘ को मुख्य नहर से जोड कर पानी भरा गया एवं भारत वर्ष की 41 पवित्र नदियों का जल लाकर इस सरोवर में डाला गया एवॅ सरोवर का शुभारम्भ किया गया। बाद में सरोवर पर 68 कमरों का निर्माण भी करवाया गया। सन् 1986 में ही शक्ति सरोवर के पीछे की जमीन अग्रोहा विकास ट्रस्ट के लिये खरीदी गई। सन् 1987 में ‘‘ अग्रोहा धाम ‘‘ नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ किया गया। धाम परिसर में ही स्वचालित झांकियों का दूसरा म्यूजियम द्वारिकापुरी जिसमें 20 से अधिक लीलाओं की स्वचालित झांकियाॅ बनाई गई का उदघाटन श्री शरणानन्द जी महाराज द्वारा दिनांक 24-4-2005 को किया गया। दिनांक 20-5-1996 को ‘‘बृजवासी अतिथी ग्रह‘‘ का शिलान्यास गुरु श्री शरणानन्द जी महाराज के कर कमलो द्वारा किया गया एवं एक वर्ष की अवधी में ही पूर्ण कराकर दिनांक 22-4-1997 को उदघाटन किया गया। विशाल हनुमान जी की प्रतिमा के पास ही शिव मन्दिर का निर्माण करवा कर दिनांक 20-4-1997 को उदघाटन कराया गया।


मंदिर का इतिहास

इस प्रकार अग्रवालो की जन्म भूमी अग्रोहा का पुनरुत्थान एवॅ विकास निरन्तर एवं द्रुतगती से बढता जा रहा है आज अग्रोहा पूरी तरह से रमणिक स्थल बनकर पांचवे धाम का पर्याय बन चुका है। अग्रोहा में कुल देवी महा लक्ष्मी, कुल प्रवर्तक महाराजा श्री अग्रसेन जी, विशाल 90 फुट उॅची हनुमान जी की मूर्ती, विशाल धर्मशालाए, भोजन शाला, प्रथम मंजिल पर 22 कमरो का निर्माण, अग्रोहा धाम का मुख्य द्वार जिस पर भगवान श्री कृष्ण के गीता उपदेश एवं महाराजा अग्रसेन जी की मार्तिया सभी को अपनी और आकर्षित करती है, गंगा एॅव यमुना मैया की प्रतिमाये, 120 गुना 160 फुट का विशाल सत्संग हाल हाल जिसमें 5 हजार व्यक्ति बैठ सके बनवाया, सरस्वती का मन्दिर, तीन विशाल गगन चुम्बी शिखर जिनकी उचाई 180 फिट है जिनमें आकर्षक घुमाव दार रास्तो में भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलो यथा वैष्णव देवी, तिरुपती बालाजी, अग्रेश्वर महादेव, भैरों बाबा, बर्फानी बाबा अमरनाथ, द्वारकाधीश की झांकियॅा, समुद्र मंथन की झाकी, अप्पू घर, एॅव स्वचालित रास मंडल की झाकियाॅ, रामेश्वर धाम मन्दिर, अग्रसेन माधवी भवन, महा सती शील माता का विशाल मन्दिर, अग्रोहा में हर आने वाले को आकर्षित करते है।


[ मंदिर गतिविधि ]


दिनचर्या

समय गतिविधि
06:30 AM-08:30 PM प्रतिदिन दर्शन

भजन

भजन संग्रह
यहाँ कोई रिकॉर्ड नही है

[ आयोजन ]


आने वाले आयोजन

तारीख नाम वर्णन

कार्यक्रम का कैलेंडर

समय नाम वर्णन

त्यौहार

तारीख नाम वर्णन

[ आभासी यात्रा ]