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[ मंदिर सूचना ]

मंदिर क बारे मैं

श्री खाटू श्याम जिन्हें शीश का दानी के नाम से यह संसार पूजता है .खाटू श्याम महाभारत काल में पांडव महाबली भीम के पोत्र और घटोत्कच और माँ मोर्वी ( कामकटंकटा ) के पुत्र वीर बर्बरीक ने जब हारे का साथ अपनी माँ मोर्वी को निभाने के वचन अपनी माता मोर्वी को दिया तब भगवन श्री कृष्णा ने वीर बर्बरीक से उनका शीश दान मांग लिया . वीर बर्बरीक ने ख़ुशी ख़ुशी अपना शीश भगवान श्री कृष्णा की दान में दे दिया . भगवान श्री कृष्णा इस महान शीश बलिदान से खुश होकर वीर बर्बरीक को यह वरदान दिया की जब यह संसार कलियुग में तुम्हारे मेरे नाम से "श्याम " से घर घर में पुजेगा और तुम सबकी मनोकामना पूर्ण करोगे . आज खाटू वाला श्याम अपने भक्तो की सभी मनोकामनाए पूर्ण करता है . देश विदेश से भक्त बाबा श्याम के दर्शन पाने खाटू नगरिया में आते है


मंदिर का इतिहास

श्री खाटू वाले श्याम जी की कहानी इस प्रकार है . यहा आप देखेंगे की किस तरह खाटू श्याम जी ने अपनी लीला रचकर अपने शीश को खाटू श्याम मंदिर के पास श्याम कुंड से अवतरित किया . जय हो आपकी खाटू श्याम जी खट्वा नगरी (खाटू धाम) में एक गाय जो रोज घास चरने जाती थी , रोज जमीन के एक भाग पर खडी हो जाती थी . उसके थनों से स्वता दूध की धार उस धरा में समां जाती थी जेसे की कोई जमीन के अन्दर से उस गौ माँ का दूध पी रहा है . घर पर आने के बाद गौ मालिक जब उसका दूध निकालने की कोशिस करता तो गौ का दूध उसे मिल नही पाता था . यह क्रम बहूत दिनों तक चलता रहा . गौ मालिक से सोचा की कोई न कोई ऐसा जरुर है जो उसकी गाय का दूध निकल लेता है .एक दिन उस गौ मालिक ने उस गाय का पीछा किया . उसने संध्या के समय जब यह नज़ारा देखा तो उसकी आँखे इस चमत्कार पर चकरा गयी . गौ माँ का दूध अपने आप धरा के अन्दर समाने लगा. गौ मालिक अचरज के साथ गाव के राजन के पास गया और पूरी कहानी बताई . राजा और उनकी सभा को इस बात पर तनिक भी यकीं नही आया . पर राजा यह जानना चाहता था की आखिर माजरा क्या है . राजा अपने कुछ मंत्रियो के साथ उस धरा पर आया और उसने देखा की गौ मालिक सही बोल रहा है . उसने अपने कुछ लोगो से जमीन का वो भाग खोदने के लिए कहा . जमीन का भाग जेसे ही खोदा जाने लगा , उस धरा से आवाज आई , “अरे धीरे धीरे खोदो , यहा मेरा शीश है” उसी रात्रि राजा को स्वपन आया की राजन अब समय आ गया है मेरे शीश के अवतरित होने का . मैं महाभारत काल में वीर बर्बरीक था और मेने भगवान श्री कृष्णा को अपना शीश दान में दिया दिया फलस्वरूप मुझे कलियुग में पूजित जाने का वरदान मिला है , खुदाई से मेरा शीश उसी धरा से मिलेगा और तुम्हे मेरा खाटू श्याम मंदिर बनाना पड़ेगा . सुबह जब राजा उठा तो तो स्वपन की बात को ध्यान रखकर कुदाई पुनः शरू करा दी , और फिर जल्द ही कलियुग देव श्री श्याम का शीश उस धरा से अवतरित हुआ .


[ मंदिर गतिविधि ]


दिनचर्या

समय गतिविधि
05:30 AM-07:30 AM मंगल आरती
08:00 AM-12:00 PM श्रृंगार आरती
12:30 PM-01:00 PM भोग आरती
06:30 PM-08:30 PM संध्या आरती
09:00 PM-10:00 PM शयन आरती

भजन

भजन संग्रह
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[ आयोजन ]


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